कपड़ों के ऊपर से महिला के प्राइवेट पार्ट को छूना रेप माना जाएगा

कपड़ों के ऊपर से महिला के प्राइवेट पार्ट को छूना रेप माना जाएगा

मेघालय :- ये अहम बात मेघालय हाईकोर्ट ने रेप की व्याख्या करते हुए एक केस की सुनवाई के दौरान कहा है की कपड़ों के ऊपर से महिला के प्राइवेट पार्ट को छूना रेप माना जाएगा। 
सूत्रों के मुताबिक़ दरअसल, 23 सितंबर, 2006 को एक नाबालिग के साथ मोलेस्टेशन हुआ थाजिस मामले की शकायत 30 सितंबर 2006 को  दर्ज कराई गई थी, जिसके बाद पीड़िता की एक अक्टूबर को मेडिकल जांच कराई गई थी जिसमे ये सामने आया  कि पीड़िता के प्राइवेट पार्ट को नुकसान पहुंचा था। रिपोर्ट के मुताबिक डॉक्टर ने भी ये माना कि पीड़िता के साथ रेप हुआ और वो मेंटल ट्रॉमा से गुजर रही थी। जांच में ये बात भी सामने आई थी कि पीड़िता के प्राइवेट पार्ट के अंदरूनी हिस्से को किसी भी फिजिकल एक्टिविटी से नहीं बल्कि किसी दूसरे अंग की रगड़ की वजह से नुकसान हुआ है।
आरोपी ने मेघालय हाईकोर्ट में अपील की थी जिससे पहले सेशन कोर्ट में उसे आरोपी करार कर दिया था। आरोपी ने अपनी दलील में कहा की जब उसने पीड़िता के कपडे उतारे ही नहीं तो वो रपे कैसा ,जिसके फैसले में मेघालय हाई कोर्ट ने 14 मार्च को फैसला सुनाया की कपड़ों के ऊपर से महिला के प्राइवेट पार्ट को छूना रेप माना जाएगा।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक़ कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा, 'भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 375 के तहत रेप के मामलों में सिर्फ पेनिट्रेशन होना जरूरी नहीं है। आईपीसी की धारा 375 (बी) के मुताबिक किसी भी महिला के प्राइवेट पार्ट में मेल प्राइवेट पार्ट का पेनिट्रेशन रेप की श्रेणी में आता है। ऐसे में पीड़िता ने भले ही घटना के समय अंडरगारमेंट पहना हुआ था, फिर भी इसे पेनिट्रेशन मानते हुए रेप कहा जाएगा।'
हालाँकि पीड़िता ने अपने बयान में सच कहा था की भी कहा था की आरोपी ने अपना प्राइवेट पार्ट पेनिट्रेट नहीं किया था, उसको दर्द नहीं हुआ था बल्कि आरोपी ने मेरे अंडरगारमेंट के ऊपर अपने प्राइवेट पार्ट को रगड़ा था। इसी पीड़िता के बयान को और मेडिकल रिपोर्ट को आधार मानते हुए कोर्ट ने रेप के मामले में अहम व्याख्या की है।